Friday, July 10, 2009

ओ कान्हा...




कान्हा अब तो मुरलिकी मधुर सुना दो तान

कान्हा अब तो मुरलिकी मधुर सुना दो तान

में हू तेरी प्रेम दिवानी मुजको तु पेहचान, मधुर सुना दो तान

जब से तुम संग मेंने अप्ने नैना जोड लिये है,

क्या मैंया क्या बाबुल सब्से रिस्ते तोड लिये है

तेरे मिलन को व्याकुल है ये कबसे मेरे प्राण, मधुर सुना दो तान

कान्हा अब तो मुरलिकी मधुर सुना दो तान

सागर से भि गेहरी मेरी प्रेम की गेहराई

लोक लाज कुल की मयाँदा तुज पर में तो हो आइ

मेरी प्रिती से निरमोहि अब ना बनो अन्जान,मधुर सुना दो तान

में हू तेरी प्रेम दिवानी मुजको तु पेहचान, मधुर सुना दो तान

मधुर सुना दो तान, मधुर सुना दो तान


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